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Sunday, August 3, 2014

93. सही या गलत -निर्णय आपका !



दोस्त हरेक के होते है , आपने अपने दोस्तों से क्या सीखा?
मान लीजिये आपका एक दोस्त अमीर है और दूसरा गरीब .आप गौर  करें अमीर दोस्त का उठना बैठना ,बात का अंदाज़ ,उसकी बातों का कॉन्फिडेंस ,किन सब्जेक्ट पर उसे बातें करना पसंद है उसके सपने,उसकी हताशा ,उसका उत्साह -यानी उसकी हर बात का ,हर एक्शन का ढंग से मुआयना करें . यही मुआयना अपने गरीब दोस्त का करें . दोनों का फर्क देखे ,दोनों की मानसिकता में से आपको अपने मतलब का  क्या लगता है ,आप ज्यादा किसे पसंद करते है और क्यों ?
कहते है खून के रिश्तों को आप नहीं चुन सकते ये उपरवाले की देन है  . लेकिन दोस्ती का रिश्ता - संसार का सबसे खूबसूरत रिश्ता आप चुन सकते है - लिहाज़ा ये रिश्ता बहुत सोच -समझ कर चुने .ध्यान रखें आपकी  आजकी स्थिति का निर्माण आपके गुजरे हुए कल ने किया है और आने वाले कल (भविष्य) का निर्माण आपका आज करता है  तो अपने भविष्य की खूबसूरती का निर्माण करने के लिए आज आप जो भी काम करे , बहुत सोच-समझ कर करें , जो भी दोस्त चुने सोच समझ कर चुने. मैं सही  दोस्त  चुनने की बात इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वही एक शख्स ऐसा है जो आपकी ख़ुशी में भी आपके उतना ही साथ है जितना आपके दुःख में और आपकी ज़िन्दगी में सही और अच्छी सलाह वही शख्स देता है .
आप अपने अमीर दोस्त से ये सीखे कि आपको क्या करना चाहिए और गरीब दोस्त से ये कि क्या नहीं करना चाहिए - अपनी मानसिकता तो आपने स्वयं ने ही बनानी है, अच्छे-बुरे  की  पहचान आपने स्वयं ने करनी है.
-सुबोध 
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Saturday, August 2, 2014

92. सही या गलत -निर्णय आपका !


कंडीशनिंग को समझने के लिए अमूनन जो उदाहरण लिया जाता है उसे ही ले रहा हूँ .

जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे मजबूत रस्सी से बांध दिया जाता है वो मासूम बच्चा खुद को रस्सी से  छुटाने की बड़ी कोशिश करता है लेकिन रस्सी मजबूत होती है और वो छूट नहीं पाता, लगातार कोशिश करने और लगातार हारने के बाद धीरे-धीरे ये बात उसके दिमाग में घर कर जाती है कि रस्सी बहुत मजबूत है और मैं आज़ाद नहीं हो पाउँगा . एक दिन वो हाथी वयस्क हो जाता है अब रस्सी उसकी ताकत से कमजोर है लेकिन चूँकि ये उसके दिमाग में बैठा हुआ है कि रस्सी मजबूत है सो वो प्रयत्न ही नहीं करता - हाथी के दिमाग में जो बैठाया गया है कि तुम रस्सी के मुकाबले कमजोर हो इसे ही कंडीशनिंग कहते है कुछ लोग इसे ब्रेन वाश करना भी कहते है ..

बचपन में बहुत से लोगों के साथ पैसे को लेकर इसी तरह की कंडीशनिंग की जाती है . जैसे अपनी गरीबी की मजबूरी की वजह से या खुद की नाक़ाबिलियत को जायज़ ठहराने के लिए या अपनी विपरीत परिस्थितियों की वजह से - कारण जो भी हो माँ-बाप जब बच्चे से  ये कहते है "पैसा बुराई की जड़ है " और समर्थन में कुछ उदहारण देते हो तब  लगातार ऐसा सुनते-सुनते बच्चे के दिमाग में ये बात बैठ जाती है . वयस्क  होने पर भी ये बात उसके दिमाग से नहीं निकलती . और क्योंकि वो पैसे को बुराई की जड़ मानता है सो जैसे ही उसके पास पैसा आता है वो उस तथाकथित बुराई की जड़ से छुटकारा पाने का प्रयास करता है और येन-केन-प्रकारेण सफल हो जाता है . वो व्यक्ति पैसे को रोक कर भी रखना चाहे तो रोक कर रख नहीं पाता क्योंकि यहाँ उसका अवचेतन मन अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है .दिमाग चाहता है पैसा रोककर रखे लेकिन दिल इस बुराई की जड़ से छुटकारा चाहता है  ध्यान रहे दिल ( अवचेतनमन ) और दिमाग की लड़ाई में अमूनन  दिल जीतता है और मजे की बात ये है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसको पता ही नहीं चलता कि वह किसी कंडीशनिंग का शिकार है.
- सुबोध 
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Friday, August 1, 2014

91. सही या गलत -निर्णय आपका !



एक सबसे बड़ी समस्या जो आती है वो ये कि आप पैसा कमाते है अच्छे से कमाते है फिर भी रोक कर ,इकठ्ठा करकर नहीं रख पाते . इस बात की गहराई से जांच करें कि पैसे को लेकर आपके अवचेतन मन में क्या है ? क्या ऐसे या इनसे मिलते जुलते वाक्य आपने सुने है या ऐसे किसी वाक्य में आप यकीन करते है -
पैसा बुराई की जड़ है .
अमीर बनने के लिए गलत काम करने पड़ते है
अमीर लालची होते है
अमीर टैक्स की चोरी करते है ,करप्शन को बढ़ावा देते है
अमीर स्वार्थी होते है
अमीर घमंडी  होते है
अमीर चरित्रहीन होते है 
पैसा ख़ुशी नहीं खरीद सकता
पैसा कमाने के लिए खून -पसीना एक करना पड़ता है
हर कोई अमीर नहीं बन सकता
पैसा पेड़ों पर नहीं उगता
पैसा हम जैसे लोगों के नसीब में नहीं है
पैसा हाथ का मैल है
पैसे के पीछे भागनेवाले पागल होते है
उपरवाला दो वक्त की रोटी ठीक-ठाक दे रहा है ज्यादा पैसे का क्या करना है
जिसने चोंच दी है चुग्गा भी वही देगा
मुसीबत के वक्त के लिए पैसा बचा कर रखो
रहने दो, हम इसका खर्च नहीं उठा सकते
अपनी इच्छाओं को कंट्रोल करना सीखो
गरीबों का ध्यान उपरवाला रखता है
स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है
कृपया इन शब्दों की गहराई में जाए . ये वे शब्द है जो आपको अमीर बनने से रोक रहे है ,( ऐसे शब्द या तो पैसे की बुराई कर रहे है या पैसे की अहमियत को नकार रहे है या आपका ध्यान पैसे से हटाकर और कहीं केंद्रित करने का प्रयास कर रहे है )अगर आपके सामने आपके बड़े-बुजुर्गों,सगे-सम्बन्धियों ने, दोस्तों ने ,मिलने-जुलने वालों  ने  ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है या उनके व्यवहार में ऐसा कुछ आपने होते देखा है  तो कृपया चेक करें कि वे शब्द अब भी अवचेतन में असर तो नहीं डाल रहे है - कहीं ये  कंडीशनिंग तो नहीं है .
किसी बिल्डिंग की नींव कमजोर हो  ऊपर के हिस्से को चाहे जितना सुन्दर बना लेवे ,नतीजा क्या होगा आप जानते है . आप चाहे जितना कमा लेवे लेकिन जब  आपकी अतीत की कंडीशनिंग ( आपकी ज़िन्दगी की नींव ) ही सकारात्मक  नहीं हुई है तो  नतीजा तो नकारात्मक होना ही है.  

-सुबोध
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Thursday, July 31, 2014

90. सही या गलत -निर्णय आपका !


अमीर यु हीं अमीर नहीं होता

सुरक्षित करने को अपना आज
दांव पर लगा देते है अपना भविष्य
हाँ, यही करते है अधिकतर लोग....
बिना ये समझे कि
ख़ूबसूरत भविष्य की
जड़ में आज की
खाद होती है ....
-.
चूजे को
कर दिया जाता है हलाल
मुर्गी बनने से पहले .
और रोते है रोना
कि ज्यादा सफ़ेद क्यों है
पड़ोसी की शर्ट .
-
इतना व्यस्त होते है
रोने में
कोसने में
कि तलाशते नहीं
वजह ...वजह....वजह.
-
छोटे लक्ष्य
छोटी वास्तविकताएं
छोटे प्रयत्न
ज़ाहिर सी बात है
छोटी ही होगी
उपलब्धियाँ...
-
अमीरी के रास्ते
जाने वाली सोच की सड़क
शुरू होती है
सवालों से
क्योंकि
विस्तार
वास्तविकता का
काबिलियत का
शुरू होता है.
सवालों से .....
क्या
क्यों
कब
कैसे
कहाँ
लेकिन
गरीब देता है
आधे -अधूरे जवाब
नतीजा
आधी- अधूरी उपलब्धिया
और दोष नसीब को ?????
अमीर लेता है
जिम्मेदारी
नहीं बनाता
बहाने ......
छोटी-छोटी बातें
पैदा करती है बड़ा फर्क .......

सुबोध- १६ मई,२०१४
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Wednesday, July 30, 2014

89. सही या गलत -निर्णय आपका !




अमीर लोग उनके साथ उठते-बैठते है जो उनकी तरह विजेता होते है जबकि गरीब लोग उनके साथ जो उनकी तरह गरीब होते है या हारे हुए - ये अपने-अपने कम्फर्ट जोन का मामला है .
            गरीब लोग अमीरों के साथ,विजेताओं के साथ असहज महसूस करते  है ,गरीबों को  लगता है कि ये अमीर लोग मुझे अस्वीकार कर देंगे ,मैं इनकी श्रेणी का नहीं हूँ  सो अपने अहम की संतुष्टि के लिए वे अमीरों में दोष  तलाशते हैं  और कोई न कोई आलोचना की वजह ढूंढ़ ही लेते हैं . और किसी न किसी बहाने वहां  से हटकर  अपने जैसी समान मानसिकता वालों को तलाश कर उनमे मिक्स-अप हो जाते हैं .
         अमीरों की प्रतिक्रिया कुछ अलग रूप लेती है वो गरीबों को एक हारा हुआ वर्ग मानता है और उनके लिए उसके मन में दया का भाव रहता है  ,उपदेश का भाव रहता है - उच्च स्तर पर जाकर  सोचे तो ये भी दोष तलाशना और आलोचना करना ही हुआ -शब्दों और व्यवहार में चाशनी  भर है .वे भी किसी न किसी बहाने वहां से हटकर अपने जैसी मानसिकता वालों में जाकर बैठते है.
          कहावत है एक जैसे पंछी साथ-साथ रहते है . कुल मिलाकर अपने-अपने कम्फर्ट जोन का मामला है.

मोरल- आपका कम्फर्ट जोन ही आपका आर्थिक भविष्य तय करता है वो कम्फर्ट जोन ही है जो अमीर को ज्यादा अमीर और गरीब को ज्यादा गरीब बनाता है .
- सुबोध 
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Tuesday, July 29, 2014

88. सही या गलत -निर्णय आपका !

               बहुत से लोगों को ये समझ में ही नहीं आता कि गलतियां सीखने के लिए होती  है , वे गलतियों से बचने के लिए अनजान राहों पर चलना ही नामंज़ूर कर देते है.
            

       होना ये चाहिए कि आप पर्याप्त जानकारीकट्ठी करे और उसके आधार पर कार्य करें अगर आप सफल होते है तो आप ये सीखते है कि सही तरीके से सूचनाएं कहाँ से जुटाई जानी चाहिए और किस तरह से इकट्ठी की गई सूचनाओं का उपयोग करना चाहिए और अगर असफल होते है तो आप कई तरीके से बहुत कुछ सीखते है कि सुचना के श्रोत गलत थे ,कि समर्पण में कहाँ कमी थी , कि किस डिपार्टमेंट में किस तरह की कमी रह गई जिसका नतीजा असफलता रहा . हर डिपार्टमेंट की एक अलग खासियत होती है उस खासियत में कहाँ कमी रह गई कि नतीजा पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ा और वक्त रहते मैनेजमेंट की निगाह में वो कमी क्यों नहीं आई ? इस तरह के बहुत से सवालों के माध्यम से आप बहुत कुछ सीखते है.
         अगर असफलता की कीमत आप पहले से ही निर्धारित कर लेते है तो जवाब मेँ आपको घातक परिणाम नहीं मिलेंगे ,प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले ही आप खुद से ये सवाल कर लेवे की अगर मेरा प्रोजेक्ट असफल हो गया तो अधिक से अधिक मेरा कितना नुकसान हो सकता है ? और मुझे अधिकतम कितना नुकसान होने के बाद  प्रोजेक्ट को बंद कर देना है . ये दो सबसे महत्वपूर्ण सवाल है जो हर नव -उद्यमी ( ENTREPRENEUR ) को कोई भी प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले खुद से पूछने चाहिए और सख्ती से इनका पालन करना चाहिए लेकिन चूँकि वे अपने विचारों को लेकर इतने ज्यादा पॉजिटिव होते है कि वे असफलता की सोचते ही नहीं . और विपरीत नतीजा मिलने पर वे नुकसान पर नुकसान सहे जाते है और प्रोजेक्ट " पैक-अप " करने की बजाय बर्बाद हो जाते है .

         अगर आप प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह संतुष्टि चाहते है तो अपनी सूचनाओ को चेक करे, प्रोजेक्ट तैयार करे ,बैंक में लोन अप्लाई करें ,एंजेल इन्वेस्टर्स से मिले .
अगर आप बैंक के और एंजेल इन्वेस्टर्स के सवालों का समाधान कर पाते है उनसे लोन के लिए हाँ करवा पाते है ( आपने लोन लेना है या नहीं ये अलग मुद्दा है बैंक और एंजेल इन्वेस्टर से मिलने का अर्थ प्रोजेक्ट की खामियों को समझना और दूर करना भर है ) तो खुद से सवाल करें कि मैं इस प्रोजेक्ट पर कितना खोने को तैयार हूँ , आपका जो भी जवाब हो उतने पैसे का इंतेज़ाम करे और  प्रोजेक्ट शुरू कर दीजिये  . अगर आपकी, आपके बैंकर की, एंजेल इन्वेस्टर की  कैलकुलेशन सही है तो आप पैसा बनाएंगे नहीं तो मानसिक तौर पर नुकसान के लिए आप तैयार ही है ,लेकिन इस प्रोसेस में आप जो कुछ सीखेंगे उस से आप बहुत कुछ बना सकते है , जो गलतियों से बचने का प्रयास करने वाले नहीं बना पाएंगे.
- सुबोध 
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Monday, July 28, 2014

87. सही या गलत -निर्णय आपका !



आपके व्यक्तित्व मेँ लचीलापन होना चाहिए , दिमाग की खिड़कियां खुली रखिये ,नए विचारों की ताज़ा हवा आत्मसात करते रहिये कोई भी जो पुराने विचारों में जम जाता है हकीकत में वो जड़ हो जाता है और सुचना युग में जड़ होना खतरनाक है क्योंकि यहाँ जो कल मार्किट में चर्चित था आज नए के आगमन के साथ पुराना हो गया है और चार दिन बाद आउट ऑफ़ डेटेड हो जायेगा लिहाजा आज के टाइम में जिनमें लचीलापन नहीं है वे अपनी प्रगति के रास्ते में रुकावट भर है . यह बात विचारों के साथ -साथ व्यवहार पर भी लागु होती है . इतनी तेजी से परिवर्तन हो रहा है कि कल के आदर्श,कल की मान्यताएं,कल की संस्कृति कल की हो गई है नए -नए उपलब्ध संसाधनों ने आज के रहन -सहन की परिभाषा और आवश्यकताएं बदल दी है , इस युग की चाप के अनुसार अपने व्यवहार  में लचीलापन विकसित करें .
    अमीरों की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि वे विचारों में और व्यवहारिकता में  कहीं भी जड़ नहीं होते हमेशा नया जानना चाहते है,सुनना चाहते है और कोई भी ऐसा विचार और व्यवहार जो उनके तर्कों की कसौटी पर खरा उतरता है उसे स्वीकारने को तैयार रहते है ,वे अपने अनुभव से तो सीखते ही है दुसरे के अनुभव से भी सीखने को तैयार रहते है ,वे जानते है जड़ होना नए अवसरों से आँख मूंदना है और लचीलापन नए अवसरों का द्वार है .
-सुबोध
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